Wednesday, 4 January 2017

रिश्तों का मवाद

चरमराती चारपाई पर ; 
दमकती साँसों के बीच ;
पसीने की भभकन ; 
वहाँ ना कोई अहं ; 
ना ही कोई शरम ; 
नग्नता भरा सच ; 
प्रोफेसनल सिसकारियों के ; 
क्षणिक आनंद की प्राप्ति ; 
संतुष्टि एक रात की ; 
जो सुबह ना कही जा सके ; 
कुछ ऐसी बात की ; 
उठना और फिर ; 
झटके से मुँह फेर लेना ; 
लाख दरजे बेहतर है यह ; 
आला रिश्तों की चाशनी में लिपटी ; 
अनबूझ आकांक्षाओं से ; 
अगर डूबना चाहोगे ; 
शांति की तलाश में ; 
मिलेगा सिर्फ अवसाद ; 
साफ करते करते थक जाओगे ; 
इन पाकीजा रिश्तों का मवाद ;